Justice Suryakant said Bar and bench are two sides of the same coin | जस्टिस सूर्यकांत बोले-बार और बेंच एक सिक्के के दो पहलू: इनका उद्देश्य न्याय की खोज करना, हमारा प्रयास हर मामले में सच्चाई का पता लगाना है

नई दिल्ली1 मिनट पहले

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जस्टिस सूर्यकांत साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस नियुक्त हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ज्यूडिशियरी में बार और बेंच एक सिक्के के दो पहलू हैं, जिनका उद्देश्य केवल न्याय की खोज करना है। हमारा प्रयास हर मामले में सच्चाई का पता लगाना है।

उन्होंने कहा, ‘जहां न्यायाधीश यह तय करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करते हैं कि याचिका लगाने वालों के साथ कोई अन्याय न हो, वहीं बार काउंसिल पर भी गुणवत्तापूर्ण सहायता प्रदान करने की समान जिम्मेदारी है।’

जस्टिस ने कहा कि मुझे यकीन है कि भारत के पास जो विद्वान बार है, वह न्यायपालिका के लिए बहुत बड़ी संपत्ति है। दरअसल, जस्टिस सूर्यकांत मंगलवार को अखिल भारतीय वरिष्ठ अधिवक्ता संघ के आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के 4 जस्टिस- जस्टिस मनमोहन, जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस के विनोद चंद्रन को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में प्रमोट किए जाने पर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी, बार संघ के अध्यक्ष और सीनियर एडवोकेट पी विल्सन और बार महासचिव सीनियर एडवोकेट आदिश सी अग्रवाल भी मौजूद थे।

कानून मंत्री बोले- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की प्रमुख भूमिकाएं केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा- स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व प्रमुख भूमिकाएं हैं, जिन्हें कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को निभाना है। जिससे यह तय किया जा सके कि प्रत्येक नागरिक को संपूर्ण विकास का लाभ मिले।

प्रयागराज में कहा था- भारत के लिए रूल ऑफ लॉ की गारंटी जरूरी जनवरी की शुरुआत में जस्टिस सूर्यकांत यूपी के प्रयागराज पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि ने विकसित भारत के लिए रूल ऑफ लॉ की गारंटी जरूरी है। ज्युडीशियल सिस्टम को भी अस्पतालों के रूप में काम करना होगा। जैसे अस्पतालों में फस्ट एड के साथ इलाज की सुविधा होती है, वैसे ही न्यायपालिका काम करें। जजों की संख्या के साथ क्वालिटी का होना आवश्यक है।

उन्होंने कहा था कि सबकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसके लिए बेंच और बार जब कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे तब संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा होगी तथा विकसित भारत का सपना साकार होगा। सभी को मिल-बैठकर हल निकालना चाहिए। हमारी ड्यूटी राष्ट्र व समाज के प्रति होनी चाहिए। क्वालिटी जजेज की जरूरत हमेशा से रही है और इसके लिए सभी स्टेक होल्डर को सहभागिता करनी होगी। पूरी खबर पढ़ें…

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सुप्रीम कोर्ट ने 4 मार्च को कहा कि राज्य सरकारें किफायती चिकित्सा और बुनियादी ढांचा देने में नाकाम रही हैं। इससे प्राइवेट अस्पतालों को बढ़ावा मिल रहा है। इसे रोकने के लिए केंद्र सरकार को गाइडलाइन बनानी चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और एनके सिंह की बेंच ने इस पर सुनवाई की। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि मरीजों को अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाता है। पूरी खबर पढ़ें…

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