Lawyer threatens to commit suicide in Supreme Court | वकील ने सुप्रीम कोर्ट में आत्महत्या की धमकी दी: जस्टिस ओक बोले- लिखित माफी मांगिए या नतीजे भुगतने को तैयार रहें

नई दिल्ली1 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक वकील ने आपराधिक मामले में उसकी याचिका स्वीकार न किए जाने पर आत्महत्या की धमकी दी।

इस पर जस्टिस अभय एस ओक और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने वकील से 7 मार्च तक लिखित माफी मांगने या परिणाम भुगतने को कहा।

कोर्ट ने कहा कि हम माफी मांगने के लिए मजबूर नहीं कर रहे, लेकिन माफी न मांगने पर नतीजे भुगतने को तैयार रहें।

केंद्र सरकार ने 2014 में आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।

केंद्र सरकार ने 2014 में आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है।

अब पढ़िए पूरा मामला क्या था…

सुनवाई के समय याचिकाकर्ता एडवोकेट रमेश कुमारन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पेश हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर प्रतिवादी के खिलाफ FIR रद्द की जाती है तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।

इस पर जस्टिस ओक ने कहा- आप अदालत को धमकी कैसे दे सकते हैं कि यदि हम आपकी अपील स्वीकार नहीं करते हैं तो आप आत्महत्या कर लेंगे। आप एक वकील हैं। हम बार काउंसिल से आपका लाइसेंस सस्पेंड करने और FIR दर्ज करने के लिए कहेंगे।

इसके बाद वकील ने अपना VC लिंक बंद कर दिया। कोर्ट ने अदालत में मौजूद एडवोकेट कुमारन के वकील से उसकी धमकी के लिए माफी मांगने को कहा। इसके बाद कोर्ट एडजॉर्न हो गई।

कुछ देर बाद सुनवाई फिर से शुरू हुई तो एडवोकेट कुमारन दोबारा VC के जरिए पेश हुए। उन्होंने कहा- मैं माफी मांगता हूं। मैं भावुक हो गया था। इस पर जस्टिस ओक ने कहा- नहीं, हम शुक्रवार (7 मार्च) तक लिखित माफी चाहते हैं।

कोर्ट ने यह भी कहा कि हम माफी मांगने के लिए मजबूर नहीं कर रहे, लेकिन माफी न मांगने पर नतीजे भुगतने को तैयार रहें।

आत्महत्या की कोशिश अपराध नहीं केंद्र सरकार ने साल 2014 में आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। इससे पहले यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 309 के तहत 1 साल की सजा का प्रावधान था। इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि जो आत्महत्या की कोशिश करने वाले को सजा की नहीं सलाह की जरूरत होती है।

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