Ranveer Allahbadia India’s Got Latent row: रणवीर इलाहाबादिया पर खूब बरसा सुप्रीम कोर्ट, अरेस्ट से दी राहत, जानिए कोर्टरूम बहस

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Ranveer Allahbadia India’s Got Latent row: अश्लील कमेंट मामले में रणवीर इलाहाबादिया सुप्रीम कोर्ट से फटकार लगी है. सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को कहा कि आपके दिमाग में गंदगी भरी है. चलिए जानते हैं सुप्री…और पढ़ें

आपके दिमाग में गंदगी; रणवीर इलाहाबादिया पर खूब बरसा SC, मगर अरेस्ट से दी राहत

सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से राहत दे दी

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से राहत दी.
  • सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया की भाषा पर सख्त टिप्पणी की.
  • रणवीर इलाहाबादिया के वकील ने जान को खतरा बताया.

Ranveer Allahbadia India’s Got Latent row: समय रैना के शो ‘इंडिया गॉट लेटेंट’ से जुड़े विवाद में रणवीर इलाहाबादिया को राहत के साथ-साथ फटकार मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया (Ranveer Allahbadia) की याचिका पर मंगलवार यानी 18 फरवरी को सुनवाई की. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की कि आपके दिमाग में गंदगी भरी है. ये तो गैर जिम्मेदारी की हद है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया को गिरफ्तारी से राहत दे दी.

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह की बेंच ने रणवीर की याचिका पर सुनवाई की. रणवीर इलाहाबादिया की ओर से पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ के बेटे अभिनव चंद्रचूड़ केस लड़ रहे हैं. वकील अभिनव चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि रणवीर इलाहाबादिया की जान को खतरा है. उनके खिलाफ जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं. इस पर बेंच ने कहा, ‘हम यह जानना चाहेंगे कि इस देश में अगर यह अश्लीलता नहीं है तो क्या है?’

‘आपके दिमाग में गंदगी’
सुप्रीम कोर्ट ने रणवीर इलाहाबादिया पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, ‘क्या आप (वकील) उनके (रणवीर इलाहाबादिया) द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा को परिषाषित करेंगे या समर्थन करते हैं? अश्लीलता का पैमाना क्या है? ये तो गैरजिम्मेदारी की हद है. उन्हें लगता है कि चूंकि वे लोकप्रिय हो गए हैं, इसलिए वे कुछ भी कह सकते हैं. उनके दिमाग में गंदगी भरी है. अदालत ऐसे व्यक्ति का पक्ष क्यों करे?’

चलिए जानते हैं सुप्रीम कोर्ट में क्या-क्या हुआ

रणवील इलाहाबादिया के वकील अभिनव चंद्रचूड़: कई राज्यों में मामले दर्ज हैं. उनकी जान को खतरा है.
सुप्रीम कोर्ट- आपको कैसे व्यवहार करना चाहिए. ये आपको पता है? अश्लीलता क्या है आपको पता है.

जस्टिस सूर्यकांत- सिर्फ दो एफआईआर हैं. सब ऐसे ही आते हैं कि कई एफआईआर हैं. एक मुंबई में है और दूसरी गुवाहाटी में. दोनों एफआईआर भी समान नहीं है. दोनों में अलग आरोप हैं.

जस्टिस सूर्यकांत- दोनों अलग आरोप हैं. ऐसे में एकसाथ सुनवाई की मांग कैसे की जा सकती है.

जस्टिस सूर्यकांत- आप लोगों के माता-पिता को बेइज्जत कर रहे हैं. यह गंदे दिमाग की उपज है.

वकील चंद्रचूड़ ने पूर्व के दो फैसलों का हवाला दिया.

जस्टिस सूर्यकांत- जांच और मुकदमा आपके मुताबिक नहीं चलाया जा सकता. अगर आपको खतरा है तो यह राज्य सरकार की जिम्मेदारी है. आप शिकायत करें.

जस्टिस सूर्यकांत- आपने जिस तरह के शब्द चुने हैं, उससे माता-पिता, भाई, बहनें शर्मिंदा महसूस करेंगे.

वकील चंद्रचूड़ ने जुबान काटने के एवज में 5 लाख के ईनाम का हवाला दिया.

जस्टिस सूर्यकांत- जब आप ऐसी चीज पॉपुलेरिटी चाहेंगे तो लोग धमकी तो देंगे ही. आपकी भाषा से अच्छी उसकी भाषा है. आपने जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया है, उससे माता-पिता, अभिभावक और पूरा समाज क्षुब्द होगा.

जस्टिस सूर्यकांत- हम इस तरह के व्यवहार को प्रमोट नहीं कर सकते. कानून अपना काम करेगा।

जस्टिस सूर्यकांत- आखिर वह पुलिस स्टेशन क्यों नहीं जा रहे. वकील किस हैसियत से गए. हम वकील के खिलाफ बार काउंसिल को बोलेंगे.

जस्टिस सूर्यकांत- आप कोई सेवा नहीं कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया और गिरफ्तारी से राहत दी.

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