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Agency:News18Hindi
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दक्षिण अफ्रीका के एक दूरबीन से वैज्ञानिकों ने एक दूसरी दुनिया की खोज की है. यह धरती से 32 गुना बड़ी है. यह आकाशगंगा धरती से 33 लाख प्रकाश वर्ष दूर हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धरती के थोड़ा भी करीब आता है…और पढ़ें
क्या धरती होगी तबाह?
केपटाउन. हमें पता भी नहीं रहता है, लेकिन हर समय हमारे सौरमंडल से बहुत दूर विशाल ब्रह्मांडीय घटनाएं घट रही होती हैं. ब्लैक होल भी इसी में शामिल है. वैज्ञानिक भी हर समय हर क्षण इन घटनाओं में दूसरी दुनिया की तलाश में रहते हैं. हाल ही में एक वैज्ञानिकों के ग्रुप ने दक्षिण अफ्रीका के एक दूरबीन से एक नई दुनिया की खोज की है. उन्होंने बताया है कि आकाशगंगाओं के केन्द्र में एक अतिविशाल ब्लैक होल मौजूद है.
वैज्ञानिकों ने बताया कि इन रहस्यमयी पिंडों का द्रव्यमान सूर्य से लाखों या करोड़ों गुना अधिक हो सकता है. ये इतने घने हैं कि वे अपने चारों ओर की अन्य अंतरिक्ष संबंधी गतिविधियों को तहस नहस कर देते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ये धरती के करीब आ गया तो पूरी धरती को ही निगल जाएगा क्योंकि विशाल ब्लैक होल इसके चारों ओर बड़ी मात्रा में अंतरतारकीय गैस के साथ घूम रही है.
खगोल विज्ञान पॉडकास्ट ‘द कॉस्मिक सवाना’ के एक हालिया एपिसोड में, मैंने उनके स्वरूप की तुलना चिपचिपे पदार्थ (आकाशगंगा) की एक गेंद से बाहर निकलती हुई दो चमकती छड़ियों (प्लाज्मा जेट) से की थी. खगोलविदों का अनुमान है कि समय बीतने के साथ प्लाज्मा जेट बाहर की ओर फैलते रहते हैं, और अंततः इतने बड़े हो जाते हैं कि वे विशाल रेडियो आकाशगंगा बन जाते हैं.
अंतरिक्ष में लाखों रेडियो आकाशगंगाओं की जानकारी है. लेकिन 2020 तक केवल 800 विशाल रेडियो आकाशगंगाएं ही खोजी गई थीं. इनको खोजे जाने के 50 साल के बाद पहली बार ये अस्तित्व में आई हैं. उन्हें दुर्लभ माना जाता था. हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के ‘मीरकैट’ सहित रेडियो दूरबीनों की एक नई पीढ़ी ने इस विचार को पूरी तरह बदल दिया है. पिछले पांच वर्षों में लगभग 11,000 विशालकाय तारामंडल खोजे गए हैं.
दक्षिण अफ्रीकी रेडियो दूरबीन मीरकैट की नई विशाल रेडियो आकाशगंगा की खोज असाधारण है. इस ब्रह्मांडीय विशालकाय आकाशगंगा के प्लाज़्मा जेट एक छोर से दूसरे छोर तक 33 लाख प्रकाश वर्ष तक फैले हैं. ये हमारी आकाशगंगा ‘मिल्की वे’ के आकार से 32 गुना अधिक है.
इस खोज ने हमें विशाल रेडियो आकाशगंगाओं का अध्ययन करने का एक अनूठा अवसर दिया है. ये निष्कर्ष मौजूदा मॉडलों को चुनौती देते हैं और सुझाव देते हैं कि हम अभी तक इन चरम आकाशगंगा में चल रहे जटिल प्लाज्मा भौतिकी को नहीं समझ पाए हैं. मीरकैट दूरबीन दक्षिण अफ्रीका के कारू क्षेत्र में स्थित है. यह 64 रेडियो डिशों से बना है तथा इसका संचालन और प्रबंधन दक्षिण अफ्रीकी रेडियो खगोल विज्ञान वेधशाला द्वारा किया जाता है.
यह स्क्वायर किलोमीटर ऐरे का पूर्ववर्ती है, जो 2028 के आसपास जब वैज्ञानिक परिचालन शुरू करेगा, तो यह दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन होगी. मीरकैट 2018 में पहली बार काम शुरू करने के बाद से ही दक्षिणी आकाश के कुछ छिपे हुए खजानों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है.
February 01, 2025, 14:12 IST
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