Bangladesh- 4 arrested for attacking Hindu temple | बांग्लादेश- हिंदू मंदिर पर हमले के आरोप में 4 गिरफ्तार: 170 लोगों पर दर्ज हुआ था मामला; सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भड़की थी हिंसा

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ढाका19 मिनट पहले

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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले के खिलाफ प्रदर्शन में लोग शामिल हुए।

बांग्लादेश में जांच एजेंसियों ने हिंदू मंदिरों और घरों पर हमले के आरोप में 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों पर उत्तरी जिले सुनामगंज में एक मंदिर और हिंदुओं के घरों व दुकानों में तोड़फोड़ करने का आरोप था। पुलिस ने इस मामले में 12 नामजद और 170 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

सुनामगंज जिले में 3 दिसंबर को एक फेसबुक पोस्ट के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। हालांकि विवाद के बाद पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था, लेकिन उसके स्क्रीन शॉट्स सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। इसके बाद क्षेत्र में हिंसा फैल गई थी।

दंगाइयों ने इस दौरान सुनामगंज के लोकनाथ मंदिर और हिंदुओं के घरों में तोड़-फोड़ की थी। हिंसा फैलने के बाद पुलिस ने पोस्ट करने वाले आकाश दास को उसी दिन हिरासत में ले लिया था। सुरक्षा कारणों के चलते उसे जिला मुख्यालय के पुलिस स्टेशन ले जाया गया था।

बांग्लादेश में संत चिन्मय दास की रिहाई के लिए प्रदर्शन कर लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

बांग्लादेश में संत चिन्मय दास की रिहाई के लिए प्रदर्शन कर लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

हिंदुओं पर लगातार बढ़ रहे हमले

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने के बाद से हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक हिंसा के मामले लगातार बढ़े हैं। ‘सेंटर फॉर डेमोक्रेसी, प्लुरलिज्म एंड ह्यूमन राइट्स’ (CDPHR) की रिपोर्ट के मुताबिक 5 से 9 अगस्त के बीच ही बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ लूटपाट की 190 घटनाएं सामने आई थीं।

साथ ही 32 घरों में आगजनी, 16 मंदिरों में तोड़-फोड़ और यौन हिंसा के 2 मामले सामने आए थे। रिपोर्ट के मुताबिक 20 अगस्त तक हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के कुल 2010 मामले सामने आए। हिंदू परिवारों पर हमले के 157 और मंदिरों के अपमान के 69 मामले शामिल थे।

दुर्गा पूजा के दौरान भी बांग्लादेश में पंडालों को निशाना बनाया गया था। इसके अलावा मूर्तियों को खंडित करने की कई घटनाएं भी दर्ज की गई थीं।

राजद्रोह के आरोप में इस्कॉन संत गिरफ्तार

संत चिन्मय कृष्ण दास ने बांग्लादेशी हिंदुओं पर हुए अत्याचार के खिलाफ लोगों को एकजुट किया था।

संत चिन्मय कृष्ण दास ने बांग्लादेशी हिंदुओं पर हुए अत्याचार के खिलाफ लोगों को एकजुट किया था।

यूनुस सरकार ने इस्कॉन संत चिन्मय कृष्ण दास को राजद्रोह के आरोप में 25 नवंबर को गिरफ्तार किया था। चिन्मय प्रभु पर उनकी एक रैली के दौरान नेशनल फ्लैग (राष्ट्रध्वज) के अपमान का आरोप लगा था। ये रैली 25 अक्टूबर को चटगांव के लाल दीघी मैदान में हुई थी।

रैली के बाद BNP नेता फिरोज खान ने चिन्मय प्रभु और अन्य लोगों के खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। दरअसल रैली के दौरान कुछ लोगों ने आजादी स्तंभ पर बांग्लादेश के नेशनल फ्लैग से ऊपर सनातन जागरण मंच का ध्वज फहरा दिया था। बांग्लादेश में नेशनल फ्लैग से ऊपर कोई और फ्लैग फहराना देशद्रोह माना जाता है।

चिन्मय प्रभु की गिरफ्तारी के बाद चटगांव में हिंसा फैल गई थी। इस हिंसा में एक वकील की भी मौत हुई थी। वकील की मौत के बाद एक बार फिर चिन्मय प्रभु और अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। इस मामले में 164 नामजद और लगभग 500 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।

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