शेख हसीना ने दो फोन किए पर इस्तीफा सौंपे बिना भारत भागीं; बरसे बांग्लादेश प्रेजिडेंट

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बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को देश छोड़े तीन महीने होने वाले हैं, लेकिन उन्हें लेकर बांग्लादेश में गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हसीना बांग्लादेश छोड़ने के बाद से भारत की शरण में हैं। बांग्लादेश सरकार ने उनका राजनयिक पासपोर्ट रद्द करवा दिया है और उनके खिलाफ 100 से अधिक मामले भी दर्ज हैं। हसीना के खिलाफ कोर्ट की कार्यवाही का प्रसारण पूरा देश लाइव देखेगा। इस बीच बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का कहना है कि देश छोड़ने से पहले हसीना ने मुझे दो फोन जरूर किए, लेकिन इस्तीफा नहीं सौंपा, शायद उनके पास समय नहीं था। हमारे पास हसीना के इस्तीफा से जुड़ा कोई भी सबूत नहीं है।

बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने यह बयान सोमवार को बांग्ला दैनिक मनाब जमीन के साथ इंटरव्यू के दौरान दिया। अखबार ने शहाबुद्दीन के हवाले से कहा कि मैंने सुना है कि हसीना ने बांग्लादेश से भागने से पहले पीएम पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन हमारे पास ऐसा कोई सबूत नहीं है। हसीना के 5 अगस्त को भारत भाग जाने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता 84 वर्षीय मुहम्मद यूनुस को 8 अगस्त को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का मुख्य सलाहकार बनाया गया।

हसीना ने दो बार फोन किया

राष्ट्रपति ने कहा, कई प्रयासों के बावजूद, वह कोई दस्तावेज़ ढूंढने में असफल रहे। शहाबुद्दीन ने कहा, ”शायद उनके पास समय नहीं था।” 5 अगस्त की घटना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि सुबह करीब 10:30 बजे हसीना के आवास से फोन आया और बताया गया कि हसीना उनसे मिलेंगी। राष्ट्रपति ने आगे कहा, “यह सुनकर, तैयारी शुरू हो गई। एक घंटे के भीतर एक और कॉल आई, जिसमें कहा गया कि वह नहीं आ रही हैं।”

टीवी पर सुना हसीना देश छोड़कर भाग गईं

उन्होंने आगे कहा, “उस समय हर जगह अशांति फैली थी। मैंने अपने सैन्य सचिव जनरल आदिल (मेजर जनरल मोहम्मद आदिल चौधरी) से इस पर गौर करने के लिए कहा। उनके पास भी कोई जानकारी नहीं थी। हम इंतजार कर रहे थे और टीवी देख रहे थे। टीवी से पता लगा कि वह (हसीना) मुझे बताए बिना देश छोड़कर चली गई हैं।

शहाबुद्दीन ने आगे कहा, “जब सेना प्रमुख, जनरल वेकर बंगभवन आए, तो मैंने यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या प्रधान मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। जवाब वही था- उन्होंने भी सुना था कि उसने इस्तीफा दे दिया है लेकिन शायद हमें सूचित करने का समय नहीं मिला होगा। जब अब सब कुछ नियंत्रण में है तो एक दिन कैबिनेट सचिव हसीना के त्याग पत्र की एक प्रति लेने आये। मैंने उनसे कहा कि मैं भी इसे ढूंढ रहा हूं।” उन्होंने कहा कि अब इस पर बहस करने का कोई मतलब नहीं है। हसीना चली गई है और यही सच है।

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