24 घंटे, सातों दिन नशे में धुत्त रहता है शख्स, नहीं पीता शराब, बस खाने से होता है हैंगओवर! जानिए वजह

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दुनियाभर में कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनके बारे में सुनकर हैरानी होती है. इन दुर्लभ बीमारियों का इलाज भी नहीं हो पाता है. इनमें से कोई अपने ही बाल को नोंचकर खाने लगता है, तो किसी की चमड़ी कागज की तरह पतली होती है. बाल नोंचकर खाने वाली दुर्लभ बीमारी को ट्राईकोटिलोमेनिया नाम से जाना जाता है. वहीं, कागज की तरह पतली स्कीन वाले बीमारी को एपिडर्मोलिसिस बुलोसा (ईबी) अर्थात बटरफ्लाई डिजीज कहा जाता है. ऐसी कई और बीमारियां हैं, जिनके बारे में जानकर दिमाग की बत्ती गुल हो जाती है. आज हम आपको एक ऐसी ही दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे देखने के बाद ऐसा लगता है कि ये शख्स 24 घंटे और सातों दिन नशे में धुत्त रहता होगा. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि ये शराब बिल्कुल नहीं पीता है. बस खाना खाते ही इसे हैंगओवर होने लग जाता है.

अमेरिका के रहने वाले इस शख्स का नाम मैथ्यू हॉग है. इनसे जुड़ा इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट भी वायरल हो रहा है, जिसमें लिखा है कि मैथ्यू हॉग हर समय नशे में रहते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि वो पूरे दिन नशा करता है. बल्कि, वो जो भी खाता या पीता है, उसका शरीर अंदर ही अंदर उसे शराब की तरह बना देती है. इस बीमारी को ऑटो ब्रू सिंड्रोम कहा जाता है. जब हमने मैथ्यू के बीमारी के बारे में जानने के लिए इंटरनेट पर सर्च किया तो पता चला कि वो इस बीमारी से पिछले 25 सालों से जूझ रहे थे. उन्हें पता भी नहीं था कि ये कोई बीमारी है. लेकिन कुछ सालों पहले जब उन्होंने इसकी जांच करवाई तो पता चला कि वे एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित हैं. इस बीमारी के बारे में जानने के लिए मैथ्यू ने साढ़े 6 लाख रुपए का टेस्ट करवाए, तब मेक्सिको के एक हॉस्पिटल से इसके बारे में पता चला.

मैथ्यू को इस बीमारी के कारण जॉब से लेकर फैमिली तक में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन जब से उन्हें इसके बारे में पता चला, तब से वो स्ट्रिक्ट डायट लेने लगे. हालांकि, उनकी बीमारी अभी भी ठीक नहीं हुई है, क्योंकि इसका इलाज नहीं है. लेकिन खान-पान पर कंट्रोल कर उसे काफी हद तक सुधारा जा सकता है, जो मैथ्यू कर रहे हैं. इसके अलावा रोजी-रोटी के लिए हॉग पार्ट टाइम जॉब करते हैं और ऑनलाइन लोगों को इस बीमारी से रूबरू करवाते हैं. बता दें कि दुर्लभ बीमारी ऑटो ब्रेवरी को गट फेरमेंटेशन सिंड्रोम के नाम से भी जाना जाता है. इससे जूझने वाले लोगों की छोटी आंत, अंदर फंसे फंसे खमीर यानि यीस्ट से सबसे अधिक शराब बनाती है जो सीधे रक्त प्रवाह में अवशोषित होती है.



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