Manipur Jiribam Violence Update; Kuki Vs Meitei Firing | Mongbung | मणिपुर के जिरीबाम में हिंसा, मैतेई गांव पर फायरिंग: चुराचांदपुर-कांगपोकपी में 3 दिनों का बंद; कुकी समुदाय सिक्योरिटी एडवाइजर के बयान का विरोध कर रहे

इंफाल43 मिनट पहले

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सुरक्षाकर्मियों ने 15 सितंबर को बॉर्डर और संवेदनशील इलाकों में तलाशी अभियान चलाया था।

मणिपुर के जिरीबाम जिले में शनिवार, 28 सितंबर को फिर हिंसा हुई। पुलिस ने बताया कि संदिग्ध उपद्रवियों ने सुबह करीब 11.30 बजे मोंगबुंग मैतेई गांव में अंधाधुंध फायरिंग की। गांव के वालंटियर ने जवाबी कार्रवाई की। फिलहाल गोलीबारी जारी है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा रहा है।

दूसरी तरफ, चुराचांदपुर और कांगपोकपी जिलों में आज बंद का दूसरा दिन है। इसके कारण बाजार बंद रहे। सड़कें वीरान दिखीं। अधिकारियों ने बताया कि कुकी-जो समूहों ने दोनों जिलों में रविवार, 29 सितंबर तक बंद का आह्वान किया है।

इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) और कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (KSO) सहित अन्य कुकी समुदाय सिक्योरिटी एडवाइजर कुलदीप सिंह के बयान का विरोध कर रहे हैं। कुलदीप सिंह ने 20 सितंबर को दावा किया था कि मणिपुर में म्यांमार से 900 कुकी उग्रवादी घुस गए हैं।

कुलदीप सिंह के मुताबिक, ये उग्रवादी ड्रोन बम, प्रोजेक्टाइल, मिसाइल और गोरिल्ला युद्ध में ट्रेंड हैं। ये 30-30 लोगों के ग्रुप में हैं और अलग-अलग क्षेत्राें में छिपे हुए हैं। वे 28 सितंबर के आसपास मैतेई गांवों पर हमले कर सकते हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने 25 सितंबर को ऐसे किसी हमले का दावा वापस ले लिया था।

कांगपोकपी में भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त

सुरक्षाबलों ने 27 सितंबर को तीन जिलों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया।

सुरक्षाबलों ने 27 सितंबर को तीन जिलों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद जब्त किया।

मणिपुर पुलिस ने शनिवार, 28 सितंबर को बयान जारी कर बताया कि सुरक्षाबलों ने तीन जिलों से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी जब्त किया है। मणिपुर पुलिस और असम राइफल्स की एक जॉइंट टीम ने कांगपोकपी जिले के लोइचिंग रिज से दो .303 राइफल, मैगजीन के साथ एक 9 मिमी पिस्तौल, कारतूस, चार हैंड ग्रेनेड, दो डेटोनेटर और एक देसी मोर्टार और लंबी दूरी का इम्प्रोवाइज्ड मोर्टार जब्त किया है।

पुलिस, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के सुरक्षाबलों ने चुराचांदपुर जिले के गोथोल गांव में एक अन्य सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान दो मोर्टार जब्त किए गए, जिन्हें स्थानीय तौर पर पम्पी कहा जाता है।

राज्य पुलिस और असम राइफल्स ने थौबल जिले में फीनोम पहाड़ी रेंज से 4 HE-36 हैंड ग्रेनेड, दो पम्पी शेल, 3 डेटोनेटर और एक स्टन ग्रेनेड, स्टिंगर ग्रेनेड और आंसू गैस के गोले भी जब्त किए। सभी हथियार शुक्रवार, 27 सितंबर को जब्त किए गए। हालांकि, कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाएं…

1 सितंबर- पहली बार ड्रोन से हमला: एक सितंबर को राज्य में पहली बार ड्रोन हमला देखने को मिला। इंफाल वेस्ट जिले के कोत्रुक गांव में उग्रवादियों ने पहाड़ी के ऊपरी इलाके से कोत्रुक और कडांगबांड घाटी के निचले इलाकों में फायरिंग की और ड्रोन से हमला किया। इसमें 2 लोगों की मौत और 9 घायल हुए।

3 सितंबर- दूसरा ड्रोन अटैक: इंफाल जिले के सेजम चिरांग गांव में उग्रवादियों ने ड्रोन अटैक किए। इसमें एक महिला समेत 3 लोग घायल हो गए। उग्रवादियों ​​​​​​ने रिहायशी इलाके में ड्रोन से 3 विस्फोटक गिराए, जो छत को तोड़ते हुए घरों के अंदर फटे। उग्रवादियों ने पहाड़ी की चोटी से गोलीबारी भी की।

6 सितंबर- पूर्व CM के घर रॉकेट से हमला: बिष्णुपुर जिला स्थित मोइरांग में पूर्व मुख्यमंत्री मैरेम्बम कोइरेंग के घर पर हमला हुआ था। कुकी उग्रवादियों ने रॉकेट बम फेंका। इस हमले में 1 एक बुजुर्ग की मौत हो गई, जबकि 5 लोग घायल हो गए। मैरेम्बम कोइरेंग राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे।

7 सितंबर- जिरिबाम में दो हमले, 5 की मौत: पहली घटना जिला हेडक्वार्टर से करीब 7 KM दूर हुई। यहां संदिग्ध पहाड़ी उग्रवादियों ने एक घर में घुसकर बुजुर्ग को सोते समय गोली मार दी। वे घर में अकेले रहते थे। दूसरी घटना में कुकी और मैतेई लोगों के बीच गोलीबारी हुई। इसमें 4 लोगों की मौत हुई।

4 पॉइंट्स में समझिए मणिपुर हिंसा की वजह…

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

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