27 मिनट पहलेलेखक: राजेश साहू/अनुराग गुप्ता
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फेसबुक पर पूजा अग्रवाल नाम की लड़की की रिक्वेस्ट आई। मैं नहीं जानता था, लेकिन रिक्वेस्ट असेप्ट कर ली। कुछ देर में Hi का मैसेज आया। मैंने रिप्लाई किया। उसने नंबर मांगा। मैंने दे दिया। लड़की ने वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल किया। मैंने रिसीव किया। सामने दिख रही लड़की न्यूड हो गई। हमने फोन काट दिया। कुछ देर बाद फिर से फोन आया। हमने दोबारा नहीं उठाया। कुछ देर बाद ही हमें एक एडिटेड वीडियो मिला और ब्लैकमेलिंग शुरू हो गई।
असल में यह एक ट्रैप है। जो भी इसके चपेट में आ जाता है, उसे यह कंगाल कर देते हैं, आत्महत्या के लिए मजबूर कर देते हैं। हमने इस पूरे प्रोसेस की पड़ताल की। खुद इनके बनाए जाल में गए और बाहर आ गए। लेकिन बहुत सारे लोग बाहर नहीं आ पाए। आज हम संडे स्टोरी में इसी ट्रैप की पूरी पड़ताल करेंगे। आइए, पहले खुद फंसते हैं फिर फंसे हुए लोगों की कहानियां जानते हैं...
हलो…कैसे हो..वीडियो कॉल करो
फेसबुक पर मेरे पास पूजा अग्रवाल नाम के यूजर की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। प्रोफाइल खोला, तो कोई भी मेरा म्यूचुअल फ्रेंड नहीं दिखा। इसके बाद भी मैंने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। रिक्वेस्ट स्वीकार करते ही मैसेज आया। Hi, How are you? इस मैसेज का हमने जवाब दिया। कुछ देर में मैसेज आया, ‘What are you doing?’ मतलब तुम क्या कर रहे हो। इसके जवाब में मैंने लिखा, अभी तो कुछ भी नहीं। ऐसे ही बैठे हैं।

यूजर ने कहा, ‘अपना नंबर दो। वीडियो कॉल करना है।’ हमने कहा- ‘बिना जान पहचान के वीडियो कॉल?’ उसका जवाब आया- ‘हां, क्या दिक्कत है? वीडियो कॉल से जान पहचान हो जाएगी।’ हमने तुरंत नंबर नहीं दिया। कुछ देर बाद उसने फेसबुक पर ही वीडियो कॉल कर दिया। हमने काट दिया और मैसेज किया कि घर में आस-पास और भी लोग हैं। कल करना। इसके बाद मैंने उसे अपना वॉट्सऐप नंबर दे दिया।
कैमरे पर चेहरा दिखाता तो फंस जाता
अगले दिन हम ऑफिस में बैठे थे। उसका मैसेज आया कि क्या आप फ्री हैं? मेरे हां में जवाब देते ही उसने वॉट्सऐप पर वीडियो कॉल कर दिया। हमने उस कॉल को रिसीव किया। सामने एक लड़की थी। वीडियो धुंधला था, इसलिए उसकी शक्ल पहचान पाना मुश्किल था। इसके बाद उसने अश्लील हरकतें शुरू कर दी। मैंने कहा कि यह सब मत करिए। लेकिन उसने इन बातों को नजरअंदाज करके वह अश्लील हरकतें करती रही।
हमने फोन काट दिया। इसके बाद फिर से फोन आया। वह हमें भी अपने जैसा करने के लिए कहती। लेकिन हमने मना कर दिया। कहा कि अब रात में बात करते हैं। असल में हमने यहां चालाकी दिखाई। वीडियो कॉल के दौरान हमने अपना चेहरा उसके कैमरे में नहीं दिखाया। अगर हम चेहरा दिखाते तो क्या होता? आइए, अब उन लोगों की कहानियां जानते हैं, जिन्होंने वीडियो कॉल में चेहरा दिखाया। उसके पहले यह ग्राफिक देखिए।

एक एडिटेड वीडियो ने सुसाइड करने पर मजबूर कर दिया
यह कहानी लखनऊ के चिनहट के एक व्यक्ति की है। उनके पास फेसबुक पर फेक महिला आईडी से रिक्वेस्ट आई। उन्होंने स्वीकार की। मैसेज आया और फिर ठेकेदार ने अपना वॉट्सऐप नंबर दे दिया। उन्हें उस यूजर ने वीडियो कॉल किया। अश्लील हरकतों के साथ अश्लील बातें करनी लगी। ठेकेदार समझ नहीं पाए कि यह एक ट्रैप है। वह सामने मोबाइल रखकर उससे लंबी बातचीत करने लगे। उसने जैसा कहा ठेकेदार वैसा ही करते चले गए।
लड़की ने वीडियो कॉल काट दी। कुछ देर बाद ठेकेदार के मोबाइल पर मैसेज आया। वॉट्सऐप खोला, तो देखा कि जिस नंबर से वीडियो कॉल आया था, उसी नंबर से एक वीडियो आया है। डाउनलोड किया। देखकर माथा पकड़ लिया। क्योंकि जो वीडियो था वह न्यूड था और उसमें ठेकेदार खुद थे। यह एडिट करके बनाया गया था। ठेकेदार ने तुरंत मैसेज किया, प्लीज इसे डिलीट कर दीजिए। सामने से मैसेज आया कि 22 हजार रुपए भेज दो, हम हटा देंगे। ठेकेदार ने पैसा भेज दिया।
दो दिन बीते। फिर से एक फोन आया। सामने वाले ने अपना परिचय एसपी के रूप में दिया। कहा कि तुम्हारी एक लड़की के साथ न्यूड वीडियो वायरल हो रही है। इस वजह से लड़की ने जहर खा लिया। हम तुम्हारे खिलाफ FIR दर्ज कर रहे हैं। फोन रखने के बाद उसने अस्पताल में स्ट्रैचर पर लेटी एक लड़की की फोटो भेज दी। इसके बाद फिर से फोन किया और कहा कि 66 हजार रुपए भेजो तब कुछ हो सकता है।
ठेकेदार ने अंकित शर्मा नाम के व्यक्ति के खाते में 66 हजार रुपए भेज दिया। लगा कि मामला खत्म हो जाएगा, लेकिन नहीं। इसके बाद ठेकेदार से 10 लाख रुपए की डिमांड हुई। यह मांग पूरी कर पाना संभव नहीं था। लगातार फोन आने से ठेकेदार परेशान हो गए और उन्होंने आत्महत्या कर लिया।
- ट्रैप का ऐसा ही मामला बांदा, कानपुर, पीलीभीत से भी सामने आया। बरेली में तो पुलिस इंस्पेक्टर इसके शिकार बने। आइए उनका मामला समझते हैं।
दरोगा ने 57 हजार दिए लेकिन छुटकारा नहीं मिला
11 मार्च 2023 को बरेली के रिटायर्ड दरोगा के पास वीडियो कॉल आया। यहां भी लड़की ने खुद का नाम पूजा बताया। देखते ही देखते वह न्यूड हो गई। दरोगा को अपनी बातों में फंसाकर जो कहती यह भी वही करते। इसके बाद फोन कटा और वीडियो बनकर वॉट्सऐप पर आ गया। वॉट्सऐप के अलावा यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट कर दिया गया। दरोगा डर गए। उनसे इसे हटाने के लिए 57 हजार रुपए मांगे गए। उन्होंने भेज दिया।

यह एक फेक प्रोफाइल है, अक्सर लोगों को फंसाने के लिए इसका इस्तेमाल होता है।
इसके बाद फिर से फोन आए। दरोगा ने डेढ़ लाख रुपए किसी प्रकाश गुप्ता और 10 हजार रुपए स्वाति मिश्रा नाम की यूजर के खाते में डाल दिया। यह प्रताड़ना बढ़ती जा रही थी। एक व्यक्ति ने वीडियो कॉल किया और खुद को सीबीआई में तैनात IPS अधिकारी आलोक कुमार बताया। उसने कहा कि तुम्हारा वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है, हटाना चाहते हो तो 83 हजार रुपए भेजो। दरोगा परेशान हो गए और उन्होंने अपना फोन बंद कर लिया। पीड़ित दरोगा ने सुभाष नगर थाने में मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने केस लिखकर छापेमारी शुरू की और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
- इस स्टोरी में पुलिस की एंट्री से पहले हम यह समझते हैं कि इनके निशाने पर कौन होता है?
रिटायर्ड बुजुर्ग सबसे ज्यादा निशाने पर
हमने इस तरह के ट्रैप के मामलों को देखा। आंकड़े जुटाए। ज्यादातर वो लोग इसमें फंसे हुए मिले जो सरकारी नौकरियों से रिटायर्ड हैं या फिर व्यवसायी हैं। 40 से 50 साल के वह लोग इसमें फंसे जिन्होंने सोशल मीडिया की बहुत जानकारी नहीं है। इस ट्रैप में युवा भी फंसे। इनको फंसाने के लिए पहले फेसबुक पर फेक आईडी के जरिए जोड़ा गया। इन युवाओं में जिन्होंने उनकी प्रोफाइल फोटो पर कमेंट किया, उन्हें मैसेज करके नंबर लिया गया और फिर अपने ट्रैप में फंसाया गया।
इस काम को अंजाम देने वालों को किसी भी चीज से डर नहीं लगता। यह पुलिस के अफसरों को फंसाते हैं, यह वकीलों को भी फंसाते हैं। यह वीडियो कॉल के लिए जिन नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। वह किसी और के नाम से होता है। उस पर नॉर्मल कॉल नहीं की जा सकती। वॉट्सऐप के लिए भी ये वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। लोकेशन हमेशा ऑफ रखते हैं। ऐसे में यह जान पाना भी मुश्किल होता है कि ये कहां से अपना पूरा सिस्टम संचालित कर रहे हैं।
अब सवाल है कि इनसे बचा कैसे जा सकता है? इनसे बचने का एकमात्र उपाय है कि आप ऐसे लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट न स्वीकार करें, जिन्हें आप पहचानते नहीं। वॉट्सऐप पर नए नंबर के वीडियो कॉल रिसीव करते वक्त कैमरे पर हाथ जरूर रख लें। बाकी बातें आप इस ग्राफिक से समझिए।

DCP ने कहा-फंसे तो हमारे पास आएं, हम गोपनियता के साथ निदान करेंगे
हम लगातार बढ़ते ट्रैप के इन मामलों को लेकर DCP सेंट्रल अपर्णा कौशिक के पास पहुंचे। हमने उन्हें इस तरह के ट्रैप के बारे में बताया। वह कहती हैं, “ऐसी शिकायतें हमारे पास भी लगातार आती हैं। हमने इन्हीं चीजों को देखते हुए NCRB पोर्टल की शुरुआत की है। आप वहां शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है। पूरी गोपनियता के साथ हम ऐसे मामलों की जांच करते हैं और आरोपी को पकड़ते हैं। कई केस में आरोपियों को पकड़ा गया है और उन्हें जेल भेजा गया है।”
कुल मिलाकर ऐसे मामलों में समझदारी ही बचाव है। थोड़ी सी भी नासमझी पहले तो आपका आर्थिक नुकसान करेगी फिर सामाजिक। कई बार ऐसी स्थिति में लाकर छोड़ देगी, जहां से जीवन व्यर्थ लगेगा। मरना एक विकल्प। इसलिए ऐसे ट्रैप से खुद को बचाएं। दूसरों को जागरूक करें।

एफआईआर कराने से डरते हैं ट्रैप में फंसे लोग
क्राइम ब्रांच इंस्पेक्टर सतीश चंद्र साहू बताते हैं, ”इस तरह के सेक्सटॉर्शन के कई मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन साइबर क्राइम बिना FIR के नंबर ट्रैस नहीं कर सकता हैं। कई बार लोग साइबर क्राइम के ऑफिस तक तो आते हैं। मगर जब उन्हें थाने जाकर FIR करने को कहा जाता है, तो वापस नहीं आते हैं। शिकायत मिलने पर साइबर क्राइम पूरी मदद करती हैं। कई बार छापेमारी में ऐसे गिरोह पकड़े गए हैं।
