ईरान के खिलाफ इजरायल की मदद में जुटा यह मुस्लिम देश, लड़ाकू जहाजों को देगा पनाह?

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ईरान की राजधानी तेहरान में हमास के प्रमुख इस्माइल हानिया की 31 जुलाई को हुई मौत के बाद ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। हानिया की हत्या को लेकर ईरान ने इजरायल पर आरोप लगाया है और इसके खिलाफ प्रतिशोध की चेतावनी दी है। ईरान की इस धमकी ने क्षेत्रीय स्थिति को और जटिल बना दिया है, जबकि इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।

इस स्थिति में जॉर्डन का नाम उछलकर आया है। बताया जा रहा है कि जॉर्डन ने इजरायल को अपनी एयरस्पेस का उपयोग करने की अनुमति देने की पेशकश की है। इस खबर की पुष्टि इजरायली चैनल 12 के एक उच्च सूत्रों ने की थी। हालांकि, जॉर्डन की सरकार ने इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी ने स्पष्ट किया कि उनका देश किसी भी पक्ष को युद्ध का मैदान नहीं बनने देगा और अपने हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देगा। सफादी ने अल अरबिया टीवी से बातचीत में कहा, “हम ईरान या इजरायल के लिए युद्ध का मैदान नहीं बनेंगे। हमने स्पष्ट कर दिया है कि हम किसी को भी हमारे हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं देंगे।”

जॉर्डन की एयरस्पेस की अनुमति का मुद्दा इजरायल के लिए महत्वपूर्ण था क्योंकि यह संभावित सैन्य कार्रवाई में यह सहायक हो सकता था। लेकिन जॉर्डन की सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, उसने किसी भी सैन्य गतिविधि को अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने से रोकने की घोषणा की है। पहले भी अप्रैल में जॉर्डन ने ईरान के द्वारा इजरायल पर ड्रोन और मिसाइलों के हमले के खिलाफ अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा की थी।

ईरान समर्थित फिलिस्तीनी इस्लामी समूह हमास के प्रमुख इस्माइल हानिया की हत्या के बाद से ईरान ने बार-बार इजरायल को सजा देने की धमकी दी है। ईरान और हमास दोनों ने इस हत्या के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।

ईरान और हमास की ओर से किए गए आरोपों के बावजूद इजरायल ने इस हत्या की जिम्मेदारी नहीं ली है और न ही इससे इनकार किया है। इस स्थिति ने चिंता को और बढ़ा दिया है कि गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष एक व्यापक मध्य पूर्व संघर्ष में बदल सकता है। हालांकि, हानिया की हत्या के कुछ घंटे पहले बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में इजरायली हमले में लेबनानी सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के शीर्ष सैन्य कमांडर फुआद शुक्र की हत्या ने भी इस चिंता को बढ़ाया है।

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