Jaishankar on India Canada Row | ‘मानव तस्करी, अलगाववाद, हिंसा और आतंकवाद का एक कॉकटेल कनाडा में चरम पर’, बोले विदेश मंत्री एस जयशंकर

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वाशिंगटन डीसी: विदेश मंत्री एस जयशंकर (S Jaishankar) अमेरिका के पांच दिवसीय दौरे पर हैं। वह लगातार कई महत्वपूर्ण मंचों से कनाडा को बखूबी जवाब दे रहे हैं। जयशंकर ने भारत और कनाडा विवाद (India Canada Row) पर एक बार फिर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जो आरोप लगाए हैं वो निराधार हैं। विदेश मंत्री ने गुरुवार (28 सितंबर) को विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन (Antony Blinken) और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) जेक सुलिवन (Jake Sullivan) से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने दोनों से भारत-कनाडा राजनयिक विवाद पर चर्चा की। 

उन्होंने न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम में कहा कि एक बार फिर कनाडा को जवाब देते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, “हम आज यह मानते हैं कि जब सबसे अधिक आबादी वाला देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नहीं है, जब पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वहां नहीं है, जब 50 से अधिक देशों का महाद्वीप वहां नहीं है। संयुक्त राष्ट्र में जाहिर तौर पर विश्वसनीयता की कमी है और काफी हद तक प्रभावशीलता की भी। जब हम दुनिया के पास जाते हैं, तो हम उसको नीचे गिराने जैसे दृष्टिकोण के साथ नहीं जाते। यह अहम है कि हम इसे बेहतर, कुशल, उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए क्या कर सकते हैं।”

‘…एक कॉकटेल कनाडा में चरम पर’

जयशंकर ने कहा, “कनाडा एक ऐसा देश बन गया है, जहां भारत में संगठित अपराध में शामिल लोग कनाडा का रुख कर रहे हैं। इसके साथ ही मानव तस्करी, अलगाववाद, हिंसा और आतंकवाद का एक कॉकटेल कनाडा में चरम पर है। यह एक तरह से इन मुद्दों और लोगों का टॉक्सिक कॉम्बिनेशन बन गया है, जिन्हें कनाडा में पूरा स्पेस मिल रहा है।”

मेरे राजनयिक असुरक्षित

विदेश मंत्री ने कहा, ”आज मैं वास्तव में ऐसी स्थिति में हूं जहां मेरे राजनयिक कनाडा में दूतावास या वाणिज्य दूतावास जाने में असुरक्षित हैं। उन्हें सार्वजनिक रूप से डराया-धमकाया जाता है और इसने वास्तव में मुझे कनाडा में वीजा संचालन को भी अस्थायी रूप से निलंबित करने के लिए मजबूर किया है।”

पिछले 8 वर्षों में स्पष्ट रूप से भारी परिवर्तन हुआ

उन्होंने कहा, “आज हम जिस दुनिया में रहते हैं, वह काफी हद तक पश्चिमी निर्मित है। अब, यदि आप दुनिया की तरफ देखें, तो पिछले 8 वर्षों में स्पष्ट रूप से भारी परिवर्तन हुआ है। अब, भारत के लिए, जब हम बड़े पैमाने पर पश्चिमी निर्मित दुनिया का सामना करते हैं। जाहिर है, हम उन बदलावों को प्रोत्साहित करना, सुविधाजनक बनाना, प्रेरित करना और दबाव डालना चाहेंगे जिनकी बेहद जरूरत है। इसलिए जहां तक भारत के संबंध में मैं यह ध्यान में रखता हूं। भारत गैर-पश्चिमी है, पश्चिम विरोधी नहीं है।”

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2019 में यह एक मंत्री मंच बन गया  

जयशंकर ने कहा, “इंडो-पैसिफिक से संबंधित, पिछले 6 वर्षों में एक और अवधारणा ने जोर पकड़ा वह क्वाड है। पहली बार 2007 में इसका प्रयास किया गया था, लेकिन यह टिक नहीं पाया और फिर एक दशक के बाद 2017 में इसे पुनर्जीवित किया गया। 2017 में, यह अमेरिका में नौकरशाही स्तर पर किया गया, 2019 में यह एक मंत्री मंच बन गया और 2021 में यह यह एक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री मंच बना। यह लगातार मजबूत होता जा रहा है और हमें अगले साल भारत में शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने का सौभाग्य मिलेगा।”

भारत सर्वोत्तम प्रथाओं का अवशोषक

विदेश मंत्री ने कहा, “भारत सर्वोत्तम प्रथाओं का अवशोषक है। आप सभी ने देखा होगा कि पिछले दशक में योग की हमारी प्रेरक वकालत ने वैश्विक स्वास्थ्य में सुधार किया है। दूसरी ओर, यदि आप खरीदारी करने जा रहे हैं भारत में आज, आप अपना बटुआ पीछे छोड़ सकते हैं लेकिन आप अपना फोन पीछे नहीं छोड़ सकते, क्योंकि सबसे अधिक संभावना है कि जिस व्यक्ति से आप कुछ खरीद रहे हैं वह नकद स्वीकार नहीं करेगा, और चाहेगा कि आप अपना फोन बाहर निकालें, क्यूआर कोड देखें , और कैशलेस भुगतान करें।

उन्होंने कहा कि पिछले साल हमने 90 बिलियन कैशलेस वित्तीय भुगतान किया था। केवल संदर्भ के लिए, अमेरिका लगभग 3 (बिलियन) था, और चीन 17.6 (बिलियन) था। इस साल, हम शायद इससे अधिक हो जाएंगे। मैंने जून देखा आंकड़े, यह अकेले जून में 9 बिलियन लेनदेन था। स्ट्रीट वेंडरों के पास आज उनके ठेले पर एक क्यूआर कोड होगा और वे कहेंगे, बस अपना भुगतान वहीं करें।”



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