Manipur CM met Modi-Shah in Delhi Did N Biren Singh meet PM Modi separately to discuss Manipur, asks Congress | दिल्ली में मोदी-शाह से मिले मणिपुर CM: कांग्रेस ने बीरेन सिंह पूछा- क्या राज्य की हिंसा पर चर्चा हुई, आखिर मोदी मणिपुर कब जाएंगे

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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दिल्ली में मणिपुर CM बीरेन सिंह ने PM मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। (फाइल फोटो)

कांग्रेस ने रविवार को मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह पर निशाना साधा। पार्टी ने बीरेन सिंह से सवाल पूछा कि मणिपुर के लोग पूछ रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री ने हिंसा प्रभावित राज्य के हालात पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अलग से भी मुलाकात की?

दरअसल, बीरेन सिंह ने शनिवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने अलग से PM मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे।

जयराम रमेश का सवाल- मोदी यूक्रेन दौरे से पहले मणिपुर जाएंगे या बाद में
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X में कहा कि मणिपुर के लोगों का सीधा सा सवाल है कि क्या एन बीरेन सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी से अलग से मुलाकात की और मणिपुर की स्थिति पर चर्चा की, जो 3 मई 2023 की रात से जल रहा है? क्या बीरेन सिंह ने PM मोदी को उनकी यूक्रेन यात्रा से पहले या बाद में मणिपुर आने के लिए आमंत्रित किया?

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 4 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को स्पेस में जाने से पहले मणिपुर जाना चाहिए।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने 4 जुलाई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को स्पेस में जाने से पहले मणिपुर जाना चाहिए।

राहुल गांधी बोले- मुझे नहीं लगता मणिपुर के हालात सुधरेंगे
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 8 जुलाई को असम-मणिपुर का दौरा किया। उन्होंने मणिपुर हिंसा के पीड़ितों से मुलाकात की। राहुल ने मणिपुर के हालात पर राज्य की गवर्नर अनुसुइया उइके से भी मुलाकात कर अपना पत्र सौंपा।
राहुल की आधे घंटे ज्यादा समय तक गवर्नर से चर्चा हुई। इसके बाद राहुल पार्टी के कार्यालय पहुंचे और वहां प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मणिपुर के हालात पर चिंता जताई।

राहुल ने कहा कि मणिपुर में मेरा तीसरा दौरा है। मुझे लगा था कि यहां के हालात में सुधार हुआ होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ है। ग्राउंड लेवल पर कोई इम्प्रूवमेंट नहीं है। मणिपुर को लेकर केंद्र सरकार बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है। मुझे नहीं लगता कि यहां के हालात सुधरेंगे।

राहुल ने कहा कि में रिलीफ कैंप में गया और हिंसा पीड़ित लोगों की बातें सुनीं। लोगों से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिया है। मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि नफरत से कोई रास्ता नहीं निकलेगा। मैं राजनीतिक बात करने नहीं आया हूं। मैंने गवर्नर से बात की। उनसे कहा कि कांग्रेस जो भी कर सकती है करेगी।

राहुल ने आगे कहा कि मैं पीएम से रिक्वेस्ट करता हूं कि एक-दो दिन का समय निकालकर मणिपुर आएं। यहां जो हो रहा है उसे समझने की कोशिश करना चाहिए। पूरा देश और मणिपुर के लोग भी चाहते हैं कि वे यहां आए और लोगों की परेशानी को समझें।

मणिपुर की गवर्नर अनसुइया उइके से राहुल गांधी ने मुलाकात की।

मणिपुर की गवर्नर अनसुइया उइके से राहुल गांधी ने मुलाकात की।

इस साल मणिपुर में सुरक्षाबल-पुलिस पर हमले की 5 अन्य घटनाएं…

10 जून: मणिपुर में CM के काफिले पर हमला, दो सुरक्षाकर्मी घायल; CM काफिले में नहीं थे

CM का सुरक्षा दस्ता हिंसा प्रभावित जिरिबाम में सीएम की सभा से पहले तैयारियों का जायजा लेने जा रहा था।

CM का सुरक्षा दस्ता हिंसा प्रभावित जिरिबाम में सीएम की सभा से पहले तैयारियों का जायजा लेने जा रहा था।

मणिपुर के जिरिबाम में उग्रवादियों ने मणिपुर CM बीरेन सिंह के सुरक्षा दस्ते पर हमला किया। यह सुरक्षा दस्ता सीएम की सभा से पहले तैयारियों का जायजा लेने जा रहा था। इस गोलीबारी में ड्राइवर समेत दो सुरक्षाकर्मी घायल हुए। हमले के वक्त मुख्यमंत्री काफिले में नहीं थे। पूरी खबर पढ़ें…

8 जून: जिरीबाम में उग्रवादियों ने 2 पुलिस चौकियां, 70 घर जलाए, घटना के बाद एसपी का तबादला

तस्वीर जिरिबाम की है। यहां छोटो बेकरा पुलिस चौकी को हमलावरों ने जला दिया था।

तस्वीर जिरिबाम की है। यहां छोटो बेकरा पुलिस चौकी को हमलावरों ने जला दिया था।

जिरीबाम जिले में 8 जून को संदिग्ध उग्रवादियों ने दो पुलिस चौकियों, एक फॉरेस्ट ऑफिस और 70 घरों में आग लगा दी। पुलिस का कहना है कि हमलावर 3-4 नावों पर सवार हो बराक नदी के रास्ते घुसे थे। इससे पहले गुरुवार 6 जून को भी कुछ मैतेई गांवों और पुलिस चौकियों पर हमले हुए थे। पूरी खबर पढ़ें…

26 अप्रैल: मणिपुर में CRPF के 2 जवान शहीद, कुकी उग्रवादियों ने बम फेंका था

शहीद जवानों में एक CRPF का सब इंस्पेक्टर और एक हेड कॉन्स्टेबल था।

शहीद जवानों में एक CRPF का सब इंस्पेक्टर और एक हेड कॉन्स्टेबल था।

मणिपुर में 26 अप्रैल को कुकी उग्रवादियों ने सेंट्रल फोर्स की चौकी पर बम फेंका था। इसमें 2 जवान शहीद और 2 अन्य जवान जख्मी हुए थे। यह हमला मणिपुर में लोकसभा की वोटिंग के ठीक 6 घंटे बाद विष्णुपुर जिले में हुआ था। पूरी खबर पढ़ें…

15 फरवरी: ​​​​​भीड़ ने SP ऑफिस पर हमला किया, 2 नागरिकों की मौत

प्रदर्शनकारी SP ऑफिस की बिल्डिंग में घुस गए थे। उनके हाथों में तिरंगा भी नजर आ रहा है।

प्रदर्शनकारी SP ऑफिस की बिल्डिंग में घुस गए थे। उनके हाथों में तिरंगा भी नजर आ रहा है।

मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में 15 फरवरी को हिंसा हुआ थी, जिसमें 2 लोगों की मौत हो गई थी। एक पुलिस कॉन्स्टेबल को सस्पेंड करने के विरोध में 300-400 लोगों की भीड़ ने देर रात SP और DC ऑफिस पर हमला कर दिया था। भीड़ ने पथराव और आगजनी की। घटना में 40 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। चुराचांदपुर कुकी-जो जनजाति बहुल क्षेत्र है। पूरी खबर पढ़ें…

17 जनवरी: मोरेह में सुरक्षाबलों की गाड़ी पर हमला, 2 जवान सहित 3 की मौत
मणिपुर के मोरेह इलाके में 17 जनवरी को उग्रवादियों ने सुरक्षाबलों की गाड़ी पर हमला कर दिया। इसमें दो जवानों की मौत हो गई। इसके अलावा एक कुकी समुदाय की महिला की जान चली गई। हमलावर कुकी समुदाय के बता गए थे। उपद्रवियों ने मोरेह SBI के पास सुरक्षाबलों की एक चौकी पर बम फेंके और गोलीबारी की थी। पूरी खबर पढ़ें…

मणिपुर में 3 मई 2023 से हिंसा जारी, अब तक 200 से ज्यादा मौतें
मणिपुर में पिछले साल 3 मई से कुकी और मैतेई समुदाय के बीच आरक्षण को लेकर हिंसा चल रही है। राज्य में अब तक हुई हिंसा की घटनाओं में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी हैं। 1100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। 65 हजार से ज्यादा लोग अपना घर छोड़ चुके हैं।

4 पॉइंट्स में जानिए क्या है मणिपुर हिंसा की वजह…

मणिपुर की आबादी करीब 38 लाख है। यहां तीन प्रमुख समुदाय हैं- मैतेई, नगा और कुकी। मैतई ज्यादातर हिंदू हैं। नगा-कुकी ईसाई धर्म को मानते हैं। ST वर्ग में आते हैं। इनकी आबादी करीब 50% है। राज्य के करीब 10% इलाके में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल ही है। नगा-कुकी की आबादी करीब 34 प्रतिशत है। ये लोग राज्य के करीब 90% इलाके में रहते हैं।

कैसे शुरू हुआ विवाद: मैतेई समुदाय की मांग है कि उन्हें भी जनजाति का दर्जा दिया जाए। समुदाय ने इसके लिए मणिपुर हाई कोर्ट में याचिका लगाई। समुदाय की दलील थी कि 1949 में मणिपुर का भारत में विलय हुआ था। उससे पहले उन्हें जनजाति का ही दर्जा मिला हुआ था। इसके बाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से सिफारिश की कि मैतेई को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल किया जाए।

मैतेई का तर्क क्या है: मैतेई जनजाति वाले मानते हैं कि सालों पहले उनके राजाओं ने म्यांमार से कुकी काे युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। उसके बाद ये स्थायी निवासी हो गए। इन लोगों ने रोजगार के लिए जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का ट्राएंगल बन गया है। यह सब खुलेआम हो रहा है। इन्होंने नागा लोगों से लड़ने के लिए आर्म्स ग्रुप बनाया।

नगा-कुकी विरोध में क्यों हैं: बाकी दोनों जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीट पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं। ऐसे में ST वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों का बंटवारा होगा।

सियासी समीकरण क्या हैं: मणिपुर के 60 विधायकों में से 40 विधायक मैतेई और 20 विधायक नगा-कुकी जनजाति से हैं। अब तक 12 CM में से दो ही जनजाति से रहे हैं।

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