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6 मिनट पहले
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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कांग्रेस पार्टी से ₹3567 करोड़ रुपए के टैक्स की डिमांड की।
सुप्रीम कोर्ट में आज कांग्रेस पार्टी को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से दिए गए बकाया वसूली नोटिस मामले में सुनवाई होगी।
इससे पहले 1 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर विभाग कांग्रेस के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगा। उन्होंने कहा था कि हम चुनाव के दौरान किसी भी पार्टी के लिए परेशानी खड़ी नहीं करना चाहते। इसके बाद कोर्ट ने 24 जुलाई को मामले की सुनवाई के लिए कहा था।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ₹3567 करोड़ रुपए के टैक्स की डिमांड की है। मार्च में ₹1745 करोड़ का टैक्स नोटिस भेजा था। इस नोटिस के खिलाफ कांग्रेस पार्टी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। हालांकि,टैक्स डिपार्टमेंट ने कांग्रेस के खातों से 135 करोड़ रुपए पहले ही वसूल लिए हैं।

राजनीतिक दलों को आयकर के किन नियमों के तहत छूट मिलती है
आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 13ए के तहत, रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टियों को होने वाली कमाई पर इनकम टैक्स से छूट मिलती है। धारा 13ए कहती है कि किसी भी राजनीतिक दल को घरेलू संपत्ति, अन्य स्रोत, पूंजीगत लाभ और किसी व्यक्ति से होने वाले स्वैच्छिक योगदान से होने वाली कमाई, उसकी पिछले वर्ष की कुल आय में शामिल नहीं की जाएगी, लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्तों को पूरा करना होता है।

कांग्रेस को 3,569 करोड़ रुपए का इनकम टैक्स नोटिस क्यों मिला?
मुख्य रूप से तीन मामले हैं, जिनमें कांग्रेस पर इनकम टैक्स में छूट के प्रावधानों का उल्लंघन करने के आरोप हैं…
पहला मामलाः कांग्रेस ने 2018-19 में 1 महीने देरी से फाइल किया इनकम टैक्स रिटर्न
- 2018-19 का इनकम टैक्स रिटर्न तय तारीख यानी 31 दिसंबर 2018 तक दाखिल करना था, लेकिन कांग्रेस ने इसे एक महीने से भी ज्यादा वक्त के बाद 2 फरवरी 2019 को फाइल किया।
- कांग्रेस ने इस साल उसे मिले 142.83 करोड़ रुपए के कुल डोनेशन में से 14.49 लाख रुपए के डोनेशन की डिटेल नहीं दी। उसने ये पैसा नकद में स्वीकार किया था।
- छूट के प्रावधानों का पालन न करने के चलते, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने सितंबर 2019 और फिर जनवरी और मार्च 2020 में कांग्रेस को नोटिस जारी किया।
- इन नोटिसों में साल 2018-19 के मूल्यांकन (एसेसमेंट) के बाद कुल 199.15 करोड़ रुपए की कांग्रेस की कुल कमाई पर 94.44 करोड़ रुपए के इनकम टैक्स की मांग की गई।
- कांग्रेस ने अगस्त 2021 में इस एसेसमेंट ऑर्डर को चुनौती दी। अक्टूबर 2021 में इनकम टैक्स द्वारा मांगे गए 94.44 करोड़ रुपए की वसूली पर रोक लगाने के लिए आवेदन दिया। अगस्त 2021 में ही एक एसेसमेंट ऑफिसर ने इस मामले का निपटारा कर दिया और कांग्रेस को अपने बकाया टैक्स की देनदारी का 20% देने का निर्देश दिया। इस निर्देश में कहा गया कि ऐसा न करने पर कांग्रेस को डिफाल्टर माना जाएगा।
- कांग्रेस ने इस 20% रकम का भुगतान न करके सिर्फ 78 लाख रुपए दिए। इसके बाद इनकम टैक्स ने जनवरी 2023 में कांग्रेस को एक लेटर जारी किया। इसमें फिर से कांग्रेस को अपनी देनदारी चुकाने को कहा गया। कांग्रेस ने इस निर्देश को आयकर आयुक्त (अपील) और आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल) में चुनौती दी, लेकिन कोई राहत नहीं मिली।
- कांग्रेस ने इनकम टैक्स की मांग के खिलाफ हाईकोर्ट में भी अपील की। 13 मार्च 2024 को हाईकोर्ट ने कांग्रेस की अपील खारिज कर दी। साथ ही इस मामले का उचित तरीके से निपटारा न करने को लेकर कांग्रेस की आलोचना की और कहा कि ‘कांग्रेस के ऑफिस के लोग साल 2021 से सोए हुए हैं।’
- 16 मार्च 2024 को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कांग्रेस के बैंक खातों से 135 करोड़ रुपए की वसूली की। इसमें 102।66 करोड़ रुपए की टैक्स की मांग और 32।4 करोड़ रुपए ब्याज के थे।
दूसरा मामला: 2014-21 तक कांग्रेस की कमाई के री-एसेसमेंट में गड़बड़ी निकली
- लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को 2014-21 के 7 एसेसमेंट ईयर के लिए इनकम टैक्स की तरफ से नोटिस मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये नोटिस पार्टी द्वारा नकद में हुए सैकड़ों करोड़ रुपए के इस्तेमाल से जुड़े हैं।
- अप्रैल 2019 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से जुड़े लोगों पर की गई छापेमारी के दौरान इसके सबूत मिले थे।
- इनकम टैक्स विभाग के मुताबिक, उसने कांग्रेस को मिले नकद दान और लेन-देन से जुड़ी सामग्री जब्त की है। IT का दावा है कि इन सालों के दौरान भी कांग्रेस ने आयकर में मिलने वाली छूट के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
- कांग्रेस ने इन सभी सात वर्षों के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रिएसेसमेंट को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। इनमें से तीन वर्षों की याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट ने 20 मार्च 2024 को सुनवाई की।
तीसरा मामला: 30 साल पुराने केस में कांग्रेस को 53 करोड़ का डिमांड नोटिस
- कांग्रेस ने कहा कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 30 साल बाद 1994-95 के एसेसमेंट को लेकर उसे 53 करोड़ रुपए का डिमांड नोटिस दिया है। कांग्रेस ने इसे केंद्र की प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया।
- 1994-95 के एसेसमेंट ईयर के मामले में IT डिपार्टमेंट पहले भी कांग्रेस को चेतावनी दे चुका था। कई बार ये मामला IGT प्राधिकरणों और दिल्ली हाईकोर्ट में भी गया, लेकिन कांग्रेस के पक्ष में किसी ने फैसला नहीं दिया।
- इस मामले में कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने 1 अप्रैल 2024 को सुनवाई की।
हाईकोर्ट की कार्यवाही: कांग्रेस की सभी याचिकाएं खारिज
- 22 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2014-15, 2015-16 और 2016-17 के तीन वित्तीय वर्षों के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की रिएसेसमेंट की कार्यवाही को चुनौती देने वाली कांग्रेस की याचिकाओं को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने ये सवाल भी किया था कि क्या कार्यवाही शुरू करने में देरी से एसेसमेंट पर प्रभाव पड़ेगा।
- 28 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस की चार और याचिकाएं खारिज कर दीं। इनमें साल 2017-18 से 2020-21 के चार वित्तीय वर्षों के दौरान इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा फिर से टैक्स एसेसमेंट की कार्यवाही शुरू करने को चुनौती दी गई थी।
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