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4 मिनट पहले
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समिट की शुरुआत से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भविष्यवाणी की कि यूक्रेन पीस समिट से इतिहास बदलने जा रहा है।
स्विटरलैंड में आज शनिवार से यूक्रेन पीस समिट की शुरुआत हो गई है। इस समिट का उद्देश्य रूस-यूक्रेन जंग रोकना है। दोनों देशों के बीच 841 दिनों से जारी इस जंग को रोकने के प्रयास पहले भी हुए हैं मगर इस पीस समिट को रूस-यूक्रेन के लिए शांति योजना बनाने के अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी प्रयासों में से एक माना जा रहा है।
समिट की शुरुआत से पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भविष्यवाणी की कि यूक्रेन पीस समिट से इतिहास बदलने जा रहा है। स्विटजरलैंड की राष्ट्रपति वियोला एमहर्ड के साथ एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि इस समिट के जरिए हम दुनिया को ये बताने में सफल हो रहे हैं कि संयुक्त प्रयास से युद्ध को रोका जा सकता है और दुनिया में शांति की स्थापना की जा सकती है।
भारत ने भेजा डेलीगेशन
इस दो-दिवसीय सम्मेलन में करीब 90 देशों और संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। हालांकि इसमें रूस और उसके कुछ सहयोगी देशों की मौजूदगी नहीं है। चीन और ब्राजील ने इस समिट में शामिल होने को लेकर अनिच्छा जाहिर कर दी है। भारत, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की जैसे देश जिनके रूस से अच्छे संबंध हैं वे अपने डेलीगेशन भेज रहे हैं।
वही, अमेरिका के राष्ट्रपति बाइडेन भी चुनाव प्रचार का हिस्सा बनने के कारण इस समिट का हिस्सा नहीं बनेंगे। उनकी जगह उपराष्ट्रपति कमला हैरिस होंगी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मन चांसलर ओलफ शॉल्ज समेत कई अन्य बड़े नेता इस समिट का हिस्सा बन रहे हैं। इसके साथ ही भारत भी यहां पर एक हाई-लेवल डेलिगेशन भेज रहा है।
इन अहम मुद्दों पर होगी बातचीत
इस पीस समिट में यूक्रेन में फूड सिक्योरिटी और परमाणु हथियारों के प्रयोग रोकने, के साथ-साथ रूस द्वारा जीते गए इलाके में आवाजाही की आजादी जैसे मुद्दों पर बात की जाएगी।
स्विट्जरलैंड में सम्मेलन शुरू होने से पहले शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर फिर से अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा कि अगर यूक्रेन नाटो में शामिल न होने की बात मान लेता है और क्रीमिया के अलावा लगभग रूसी नियंत्रण में आ चुके चारों प्रांतों (डोनेस्क, लुहांस्क, खेरसॉन और झापोरिझिया) पर अपना दावा नहीं करता तो वे युद्ध खत्म कर देंगे।
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