Gujarat Rajkot TRP Game Zone Fire Accident VIDEO Footage | Rajkot News | राजकोट गेम जोन हादसे का VIDEO: वेल्डिंग से निकली चिनगारी 2 मिनट में भड़की; बुझाने की कोशिश करते दिखे गेम जोन के कर्मचारी

राजकोट12 मिनट पहले

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यह वीडियो गेम जोन में लगे CCTV में रिकॉर्ड हो गया था।

राजकोट के TRP गेमजोन में 25 मई की शाम को हुए हादसे का एक CCTV फुटेज सामने आया है। इस वीडियो में शाम 5.33 मिनट पर गेम जोन के एक हिस्से में वेल्डिंग का काम होता दिख रहा है। इसी से निकलने वाली चिनगारी थोड़ी देर में भड़क जाती है। जिसे वहां मौजूद कर्मचारी बुझाने की कोशिश करते हैं।

गेम जोन से आने-जाने का एक ही रास्ता था। महज 2 मिनट के अंदर आग भयानक रूप ले लेती है, जिसके कारण पूरा गेम जोन उसकी चपेट में आ जाता है।

फायर ब्रिगेड की 8 टीमें करीब 3 घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझा पाईं। 25 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया गया। इसी हादसे में 12 बच्चों समेत 28 लोग मारे गए।

पुलिस ने गेम जोन के मालिक युवराज सिंह सोलंकी, पार्टनर प्रकाश जैन, राहुल राठौड़ और मैनेजर नितिन जैन को हिरासत में ले लिया है। हादसे के बाद चारों ने फोन बंद कर लिया था।

हाईकोर्ट में आज फिर सुनवाई, पुलिस का एक अधिकारी सस्पेंड
गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बीरेन वैष्णव और देवेन देसाई ने रविवार को हादसे पर एक्शन लेते हुए राज्य के 4 बड़े शहरों अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और सूरत के सभी गेम जोन की डिटेल मांगी है। कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में यह मैन मेड डिजास्टर है। हाईकोर्ट इस मामले पर सोमवार को भी सुनवाई करने वाला है। कोर्ट ने चारों महानगरों की महानगरपालिकाओं को 24 घंटे में इसकी जानकारी देने को कहा था।

इधर, हादसे पर एक्शन लेते हुए राजकोट पुलिस ने एक अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है।

देखिए गेमजोन में आग कैसे लगी…

1. वेल्डिंग से निकलती चिनगारी…

2. चिनगारी से वहां पड़े सामान में आग लगी

3. आग तेजी से फैलती गई

4. गेमजोन के कर्मचारियों ने इसे बुझाने की कोशिश की

राजकोट गेम जोन बिना परमिट के चल रहा था

दैनिक भास्कर को मिली यह तस्वीर करीब दो साल पुरानी है। इसमें राजकोट के तत्कालीन कलेक्टर अरुण महेश बाबू, एसपी बलराम मीणा, नगर निगम कमिश्नर अमित अरोड़ा, डीसीपी जोन-1 प्रवीण मीणा गेमिंग जोन पहुंचे थे। तस्वीर में दिखाई दे रहे ये सभी अधिकारी गेम जोन के गो-कार्टिंग का लुत्फ उठाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान टीआरपी गेम जोन के मालिकों ने अफसरों का जोरदार स्वागत किया था।

आज आ सकती है हादसे में मारे गए लोगों की DNA रिपोर्ट
गेमजोन हादसे में मारे गए लोगों की DNA रिपोर्ट आज आ सकती है। कुछ लोग इस हद तक जल गए थे कि उनकी अब तक पहचान नहीं हो पाई है। 25 डीएनए सैंपल गांधीनगर भेजे गए थे। एम्स में 16 शवों को कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। जबकि सिविल हॉस्पिटल में 11 शव रखे गए हैं।

राजकोट गेमजोन हादसे पर एक नजर

  • आग कैसे लगी: किराए की 2 एकड़ जमीन पर तीन मंजिला गेम जोन 2020 में बनाया गया था। इसका स्ट्रक्चर लकड़ी और टीन शेड पर खड़ा था। कई जगह रिपेयरिंग और रेनोवेशन का काम भी चल रहा था। एक जगह सीढ़ी पर वेल्डिंग के दौरान निकली चिनगारी से ब्लास्ट हुआ और आसपास आग लग गई।
  • आग तेजी से क्यों फैली: गेम जोन का डोम कपड़े और फाइबर से बना था। स्ट्रक्चर लकड़ी, टीन और थर्मोकोल शीट से बनाया गया था। फर्श पर भी रबर, रेग्जीन और थर्मोकोल लगा था। इसके अलावा गेज जोन में 2 हजार लीटर डीजल और 1500 लीटर पेट्रोल भी स्टोर किया गया था। इसलिए आग कुछ मिनटों में ही तेजी से फैल गई।
  • ज्यादा नुकसान की वजह: चश्मदीद के मुताबिक​​​​, आग नीचे से ऊपर तक कुछ ही मिनटों में फैल गई थी। तीन मंजिला स्ट्रक्चर में नीचे से ऊपर जाने के लिए केवल एक सीढ़ी थी। दूसरी और तीसरी मंजिल के लोगों को भागने का मौका नहीं मिला।
  • अधिकारी क्या बोले: कलेक्टर आनंद पटेल ने कहा, शव इतनी बुरी तरह जले हैं कि पहचान मुश्किल है। डीएनए टेस्ट कराना होगा। राजकोट के सभी गेम जोन बंद कर दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर राजू भार्गव के मुताबिक, टीआरपी गेम जोन के पास फायर एनओसी तक नहीं थी। सरकार ने जांच के लिए SIT बनाई है।

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तत्कालीन कलेक्टर बोले-परमिशन देने का काम निगम का

भीषण हादसा होने के बाद राजकोट नगर निगम को यह पता चला है कि गेम जोन के पास परमिट ही नहीं था। एक प्लॉट जहां पार्टियां आयोजित होती थीं, वहां तीन मंजिला शेड बनाकर उसे गेमिंग जोन बना दिया गया था। ऐसे में सवाल यह उठता है कि गेमिंग जोन को लेकर राजकोट नगर निगम अंधेरे में था या फिर अधिकारियों की गेमिंग जोन मालिकों से मिलीभगत थी। हालांकि तत्कालीन कलेक्टर ने कहा कि सवाल किया तो उन्होंने कहा कि परमिशन देने का काम तो नगर निगम का होता है। पढ़ें पूरी खबर…

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