China Taiwan Military Action; Defense Ministry | President Lai Ching Te | चीन की ताइवान को जंग की धमकी: कहा- जब तक ताइवान हमारा हिस्सा नहीं बनता, सैन्य कार्रवाई करते रहेंगे; युद्धाभ्यास में कब्जे की तैयारी की

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बीजिंग6 घंटे पहले

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23-24 मई को हुई चीन की मिलिट्री ड्रिल को ‘जॉइंट स्वॉर्ड-2024A’ नाम दिया गया था।

ताइवान में नए राष्ट्रपति के शपथ लेने के 4 दिन बाद चीन ने ताइवान को जंग की धमकी दी है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता वू कियान ने कहा है कि जब तक ताइवान चीन का हिस्सा नहीं बन जाता, इलाके में मिलिट्री एक्शन जारी रहेगा।

दरअसल, चीन ने शुक्रवार को ही ताइवान के घेरकर चल रही अपनी 2 दिवसीय मिलिट्री ड्रिल पूरी की। इस युद्धाभ्यास में चीन की तीनों सेनाएं (थलसेना, वायुसेना, नौसेना) शामिल हुई थी। इस युद्धाभ्यास को ताइवान के लिए सजा के तौर पर शुरू किया गया था।

मैप में देखिए कि चीन की सेनाएं ने कहां-कहां युद्धाभ्यास किया…

ताइवान में नए राष्ट्रपति के चुनाव से गुस्से में चीन
ताइवान में इसी साल राष्ट्रपति पद के चुनाव हुए। इसमें चीन विरोधी नेता विलियम लाई चिंग ते को जीत हासिल हुई। चुनाव से पहले चीन ने ताइवान को चेतावनी दी थी कि अगर वहां की जनता ने सही विकल्प नहीं चुना तो उन्हें इसकी सजा दी जाएगी। 20 मई को लाई चिंग ते के शपथ ग्रहण समारोह के 2 दिन बाद चीन ने अपनी मिलिट्री ड्रिल शुरू की थी।

इस दौरान चीन की सेना ने कसम खाई थी कि वह ताइवान में आजादी की मांग करने वालों का खून बहा देंगे। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि लाई चिंग ते वन-चाइना पॉलिसी के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। वे ताइवान के लोगों को जंग और तबाही की तरफ धकेल रहे हैं।

चीन के 111 एयरक्राफ्ट, दर्जनों जहाजों ने ताइवान पर कब्जे की प्रैक्टिस की
23-24 मई को हुई चीन की मिलिट्री ड्रिल को ‘जॉइंट स्वॉर्ड-2024A’ नाम दिया गया था। इसके तहत चीन के करीब 111 एयरक्राफ्ट और नौसेना के दर्जनों जहाजों ने ताइवान पर कब्जे की प्रैक्टिस की थी। इस दौरान उन्होंने ताइवान के उन हिस्सों पर हमले की भी तैयारी की थी, जहां से ताइवान चीन को रोकने की कोशिश कर सकता है।

इससे पहले चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने भी कहा था कि ताइवान में जो लोग आजादी चाहते हैं, उनके सिर कट जाएंगे। अगर वे चीन के इरादे से टकराएंगे, तो द्वीप में सिर्फ खून-खराबा होगा। चीन के युद्धाभ्यास का मकसद एक साथ पूरे ताइवान पर कब्जे की तैयारी करना था।

इससे पहले पिछले साल भी चीन ने ताइवान के पास ऐसा ही सैन्य अभ्यास किया था। यह ड्रिल तब हुई थी, जब ताइवान के तत्कालीन उपराष्ट्रपति लाई चिंग ते अमेरिका के दौरे पर गए थे।

अमेरिका-चीन के रिश्तों में ताइवान सबसे बड़ा फ्लैश पॉइंट
अमेरिका ने 1979 में चीन के साथ रिश्ते बहाल किए और ताइवान के साथ अपने डिप्लोमैटिक रिश्ते तोड़ लिए। हालांकि चीन के ऐतराज के बावजूद अमेरिका ताइवान को हथियारों की सप्लाई करता रहा। अमेरिका भी दशकों से वन चाइना पॉलिसी का समर्थन करता है, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर अस्पष्ट नीति अपनाता है।

राष्ट्रपति जो बाइडेन फिलहाल इस पॉलिसी से बाहर जाते दिख रहे हैं। उन्होंने कई मौकों पर कहा है कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है तो अमेरिका उसके बचाव में उतरेगा। बाइडेन ने हथियारों की बिक्री जारी रखते हुए अमेरिकी अधिकारियों का ताइवान से मेल-जोल बढ़ा दिया है।

इसका असर ये हुआ कि चीन ने ताइवान के हवाई और जलीय क्षेत्र में अपनी घुसपैठ आक्रामक कर दी है। NYT में अमेरिकी विश्लेषकों के आधार पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन की सैन्य क्षमता इस हद तक बढ़ गई है कि ताइवान की रक्षा में अमेरिकी जीत की अब कोई गारंटी नहीं है। चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और अमेरिका वहां सीमित जहाज ही भेज सकता है।

अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा कर लिया तो पश्चिमी प्रशांत महासागर में अपना दबदबा दिखाने लगेगा। इससे गुआम और हवाई द्वीपों पर मौजूद अमेरिका के मिलिट्री बेस को भी खतरा हो सकता है।

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