जयशंकर-ब्लिंकन।
– फोटो : जयशंकर-ब्लिंकन।
कनाडा के साथ द्विपक्षीय संबंधों में तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर बृहस्पतिवार को अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन से मिले। मुलाकात का एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि ब्लिंकन ने इस दौरान कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो के लगाए आरोपों का मामला जयशंकर के सामने रखा।
अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने वार्ता से पहले पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, मैं बैठक में जयशंकर के साथ ब्लिंकन की बातचीत का पूर्वानुमान नहीं लगाना चाहता लेकिन जैसा कि हमने पहले भी स्पष्ट किया है कि हमने इस पर अपने भारतीय समकक्षों के साथ बातचीत की है। हमने उन्हें कनाडा की जांच में सहयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे पहले वार्ता के लिए जाने से पहले जयशंकर और ब्लिंकन मीडिया के सामने आए लेकिन यहां जयशंकर ने सिर्फ यही कहा, यहां लौटकर अच्छा लग रहा है। वहीं, ब्लिंकन ने कहा, भारतीय नेताओं के साथ पिछले कुछ सप्ताह में उनकी अच्छी बातचीत हुई है। इसमें जी-2 के दौरान और संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक से इतर हुई मुलाकात भी शामिल है। दोनों ही नेताओं ने पत्रकारों के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। ट्रूडो ने आरोप लगाया है कि 18 जून को खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे भारतीय एजेंसियों का हाथ है।
अमेरिकी एनएसए से की मुलाकात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति और इसे मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की। मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र के 78वें महासभा सत्र को संबोधित करने के बाद वे वाशिंगटन पहुंचे हैं। जयशंकर ने एक्स पर कहा, बैठक में हमने हमारे द्विपक्षीय संबंधों में हुई जबरदस्त प्रगति पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री ट्रूडो के गैरजिम्मेदाराना बयान के बाद बढ़ गई हमारी मुसीबत
कनाडा में प्रवासी भारतीयों का कहना है कि पीएम जस्टिन ट्रूडो यदि भारत पर लगाए आरोपों को बेहतर तरीके से रखते, तो सही होता। उनका कहना है कि ट्रूडो ने जबसे खालिस्तानी आतंकी हरदीप निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया है कनाडा में भारतीय समुदाय और खासतौर पर हिंदुओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इससे हिंदू-सिख समुदाय में दरार पैदा हो गई है।
गीता भदौरिया ने कहा कि जो हुआ वह दोनों देशों और दोनों समुदायों के हित में नहीं। आपसी गफलत का फायदा गलत तत्व नहीं उठाएं इसके लिए यह जरूरी है कि दोनों सरकार मीडिया में बयान देकर अपनी बात रखने के बजाय सीधा संपर्क करें और इस मसले को समझदारी से हल करें, क्योंकि यह सिर्फ दो देशों की सरकार का मामला नहीं, बल्कि दुनियाभर के कई देशों में दो समुदायों के बीच के सामंजस्य का मामला है।
