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नवभारत डिजिटल डेस्क: अफगानिस्तान (Afghanistan) में भीषण बाढ़ (Flood) और भारी तबाही के बीच जनजीवन को पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ में 300 से अधिक की मौत हुई है। पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में स्थित प्रान्तों में भीषण बाढ़ आई। जिससे आठ ज़िलों में दो हज़ार से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों लोग बेघर हो गए हैं या फिर मलबा व कीचड़ जमा होने की वजह से अपने घर में फंसे हुए हैं। कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो गई है, मवेशी बह गए हैं, स्कूल बंद हैं। अपनों से बिछड़े लोग उन्हें ढूंढने की कोशिश में लगे हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन लोगों अपनों को तलाशने की करुणामई गुहार लगायी है।
खबर के मुताबिक अफगानिस्तान की इस बाढ़ में 150 से अधिक घायल हैं और बड़ी संख्या में (सैकड़ों) लोग अब भी लापता बताए गए हैं। जिनकी तलाश जारी है। सरकार की तरफ से हर मदद उपलब्ध करने का आश्वासन दिया गया है। स्थानीय कारोबारियों से मदद की अपील की गई है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत बचाव के लिए गधे और खच्चरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अफगानिस्तान में, हाल ही में आई बाढ़ से जीवित बचे लोगों के पास न तो घर है, न जमीन और न ही आजीविका का कोई स्रोत। पिछले कुछ हफ्तों में मूसलाधार बारिश के कारण बाढ़ आने की कई घटनाएं हुई हैं। आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।

कहां-कहां बाढ़ का असर बघलान, कुंदुज़, तखर, बदख्शां, समांगन, हेरात और घोर बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रांतों में से हैं, बघलान में मरने वालों की संख्या अधिक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से बाढ़ प्रभावित इलाके में सात मीट्रिक टन दवाएँ, मेडिकल आपूर्ति व किट रवाना की गई हैं। बाढ़ के बाद उपजी स्थिति में जल-जनित बीमारियों जैसे कि दस्त के सम्भावित फैलाव को टालने के लिए रोकथाम प्रयास किए जा रहे हैं।
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